SIR in Chhattisgarh: अगर आप छत्तीसगढ़ के वोटर हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है। अब आपके इलाके में BLO (Booth Level Officer) घर-घर पहुंचेंगे और वोटर सूची का सत्यापन करेंगे।
अगर आपका नाम 2003 की लिस्ट में नहीं है, तो आपको अपनी नागरिकता साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज पेश करने होंगे। आइए जानते हैं पूरी प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी।
SIR क्या है? (SIR in Chhattisgarh)
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) चुनाव आयोग द्वारा समय-समय पर कराई जाने वाली प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची की पूरी जांच होती है। यह प्रक्रिया वोटर लिस्ट को शुद्ध करने के लिए की जाती है ताकि मृतक, डुप्लीकेट, या फर्जी नाम हटाए जा सकें।
साल 1951 से 2004 के बीच यह प्रक्रिया आठ बार हुई थी, लेकिन 21 साल बाद अब इसे फिर से शुरू किया गया है। इस बार यह देशभर में चरणबद्ध तरीके से हो रही है।
🏠 अब घर-घर पहुंचेंगे BLO
4 नवंबर से छत्तीसगढ़ में BLO मतदाताओं के घर जाकर सर्वे (door to door voter verification) कर रहे हैं। अगर आपका नाम 2003 की SIR लिस्ट में पहले से है, तो किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी। आपका नाम स्वतः ही नई मतदाता सूची में शामिल कर लिया जाएगा।

लेकिन यदि 2003 की लिस्ट में आपका या आपके माता-पिता का नाम नहीं है, तो आपको अपनी नागरिकता के प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।
📑 दिखाने होंगे ये दस्तावेज
चुनाव आयोग ने नागरिकता साबित करने के लिए 13 प्रकार के दस्तावेज (required documents for voter verification) तय किए हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
- सरकार या पीएसयू द्वारा जारी पहचान पत्र या पेंशन ऑर्डर
- 1 जुलाई 1987 से पहले जारी सरकारी प्रमाणपत्र
- जन्म प्रमाणपत्र या पासपोर्ट
- मैट्रिकुलेशन या शैक्षणिक प्रमाणपत्र
- स्थायी निवास प्रमाणपत्र
- जाति प्रमाणपत्र (OBC/SC/ST)
- भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र
- वन अधिकार प्रमाणपत्र
- फैमिली रजिस्टर या NRC से संबंधित दस्तावेज (जहां लागू हो)
नाम कटने पर क्या करें?
यदि SIR प्रक्रिया में आपका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाता है, तो पहले आप कलेक्टर के पास अपील (appeal process) कर सकते हैं। यदि वहां से समाधान नहीं होता, तो मुख्य निर्वाचन कार्यालय (Chief Electoral Office) में अपील दायर की जा सकती है।

क्यों जरूरी है SIR प्रक्रिया
लंबे समय से देश में वोटर लिस्ट का शुद्धिकरण (voter list verification) नहीं हुआ था। फर्जी और डुप्लीकेट वोटरों के कारण निर्वाचन प्रणाली पर सवाल उठ रहे थे। इसीलिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इसे पुनः शुरू करने का फैसला लिया।
पहले चरण में बिहार में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, अब दूसरे चरण में छत्तीसगढ़ समेत 12 राज्यों में यह चल रही है। तीसरे चरण में बाकी राज्यों में इसे लागू किया जाएगा।
